Wednesday, 17 June 2020

Janmashtami: Shiri krishna

Krishan Janmashtami


हिन्दू धर्म के प्रमुख ईष्ट देव भगवान हैं श्री कृष्ण जी।प्रभुप्रेमियों के दिलों में श्रीकृष्ण जी का विशेष स्थान है। विष्णु जी के अवतार कृष्ण जी श्रावण माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। इसलिए इस दिन को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। पूरे भारतवर्ष में आज 3 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा रही है। कोई कृष्ण को लल्ला, कान्हा, माखनचोर, सांवलिया, लड्डू गोपाल तो कोई कृष्णा कह कर प्रेम से पुकारता है। जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण की जन्म नगरी मथुरा भक्ति के रंगों में जीवंत हो जाती है।




लोकवेद के अनुसार:-जन्माष्टमी पर स्त्री पुरुष 12:00 बजे तक व्रत रखते हैं। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती हैं और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है। और रासलीला का आयोजन होता है।
स्कन्द पुराण के मतानुसार जो भी व्यक्ति जानकर भी कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत नहीं करता, वह मनुष्य जंगल में सर्प और व्याघ्र होता है। भविष्य पुराण का वचन है- भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को जो मनुष्य नहीं करता, वह क्रूर राक्षस होता है। एक मान्यता के अनुसार आधी रात के समय रोहिणी में जब कृष्णाष्टमी हो तो उसमें कृष्ण का अर्चन और पूजन करने से तीन जन्मों के पापों का नाश होता है। लेकिन कृष्ण जी खुद अपने कर्म के पाप प्रभाव को नहीं काट सके तो भक्तों के कैसे काटेंगे। (पुराणों में लिखित मत ब्रह्मा जी का है पूर्ण ब्रह्म परमात्मा का नहीं है।)
जिस समय गीता जी का ज्ञान बोला जा रहा था, उससे पहले न तो अठारह पुराण थे, न ग्यारह उपनिषद् और न ही छः शास्त्र थे। उस समय केवल पवित्र चारों वेद ही शास्त्र रूप में प्रमाणित थे और उन्हीं पवित्र चारों वेदों का सारांश पवित्र गीता जी में वर्णित है।

श्री कृष्ण जी तथा कबीर साहेब की लीलाएं:-


Krishan Janmashtami
Krishan Janmashtami

श्रीकृष्ण जी की बचपन में परवरिश गायों के दूध और मक्खन से हुई थी और कबीर साहिब जी की परवरिश वेदो अनुसार कुमारी गाय के दूध से हुई।
Krishan Janmashtami
Krishan Janmashtami
कबीर साहिब जी ने मृत कमाल और कमाली को जीवित कर दिया जबकि श्री कृष्ण जी अपने भांजे अभिमन्यु को जीवित न कर सके । जो कि सिर्फ पूर्ण परमात्मा ही कर सकता है
Krishan Janmashtami
Krishan Janmashtami
श्री कृष्ण जी बांसुरी बजाते थे तो आसपास की गोपियां और गाय इकट्ठे होकर सुनते थे लेकिन जब कबीर परमात्मा ने यमुना के किनारे एक बार बांसुरी बजाई तो यमुना का पानी स्थिर हो गया सभी पशु पक्षी यहां तक कि आसमान में देवता भी उस बांसुरी की मधुर आवाज सुनने के लिए पृथ्वी पर आ गए।
Krishan Janmashtami
Krishan Janmashtami
श्री कृष्ण जी महाभारत का युद्ध चाह कर भी नहीं रुकवा सके और उसमें करोड़ों लोग मर गए वही कबीर साहिब जी ने अपने अंतिम समय में हिंदू मुस्लिम के बीच होने वाले महाविनाश को भी रोक लिया
Krishan Janmashtami
Krishan Janmashtami
यह अवधारणा है कि द्रौपदी जी की साड़ी कृष्ण ने बढ़ाई थी, एक अर्ध सत्य है! सत्य तो यह है कि उस समय कृष्ण जी रुक्मणी के साथ चौरस खेल रहे थे यह सारा खेल कबीर भगवान ने किया और भक्ति की लाज रखी द्रौपदी जी की साड़ी बढ़ाकर।

असली वासुदेव कौन है?
श्री कृष्ण जी तीन लोक के भगवान होने के कारण त्रिलोकीनाथ कहलाते हैं
 कबीर साहेब कुल मालिक होने के कारण वासुदेव कहलाते हैं कबीर परमात्मा सर्वशक्तिमान है वहीं सृष्टि रचना है परमात्मा सतलोक में रहते हैं जहां सुख ही सुख है वहां सभी आपस में प्रेम से रहते हैं


Krishan Janmashtami
Krishan Janmashtami
श्री कृष्ण जी 16 कला के स्वामी थे जबकि कबीर साहिब अनंत कला के स्वामी हैं।

Krishan Janmashtami
Krishan Janmashtami

दुर्वासा ऋषि द्वारा दिए गए शराब के कारण पूरा यादव कुल नाश को प्राप्त हो गया वह खुद श्री कृष्ण जी भी।
वे अपने कुल को बचा नहीं पाए तो फिर इन्हें भगवान मानने में शंका होती है?

गीता में तत्वदर्शी संत की खोज कर भक्ति करने को कहा है।
पूर्ण ब्रह्म की भक्ति के लिए पवित्र गीता अ. 4 श्लोक 34 में पवित्र गीता बोलने वाला (ब्रह्म) प्रभु स्वयं कह रहा है कि पूर्ण परमात्मा की भक्ति व प्राप्ति के लिए किसी तत्वज्ञानी सन्त को ढूंढ ले फिर वह जैसे विधि बताएं वैसे कर।
Krishan Janmashtami
Krishan Janmashtami
पवित्र गीता जी को बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि पूर्ण परमात्मा का पूर्ण ज्ञान व भक्ति विधि मैं नहीं जानता। अध्याय 15 श्लोक 4 तथा अध्याय 18 श्लोक 62 व 66 में किसी अन्य परमेश्वर की शरण में जाने को कहा है।(इसका सार यह है कि तत्वदर्शी संत की खोज करो और जैसे भक्ति विधि वह बताए उसी अनुसार करते हुए मोक्ष को प्राप्त हो जाओगे)

No comments:

Post a Comment

Mahashivratri kab h

शिवरात्रि का व्रत Mahashivratri जैसे ही शिवरात्रि नजदीक आती है हर शिवभक्त के मन मे भक्ति भाव की लहर दौड़ पड़ती है। कोई पूछता है कि शिव...