Wednesday, 24 June 2020

Temple of Jagannath


जगन्नाथ मंदिर की स्थापना

जगन्नाथ मंदिर किसने बनवाया?
आइए आज हम जानेंगे जगन्नाथ मंदिर की पूरी कहानी कि कैसे बना यह जगन्नाथ मंदिर और इसे बनाने में क्या क्या परिस्थितियां उत्पन्न हुई तथा इन परिस्थितियों को से किस प्रकार निपटा गया।
Jagannath
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उड़ीसा प्रांत का राजा इंद्रदमन चिंतित था क्योंकि श्री कृष्ण जी ने स्वपन में आकर स्थान बताते हुए कहा था कि इंद्रदमन समुद्र किनारे एक मंदिर बनवाओ जिसमें मूर्ति पूजा नहीं होनी चाहिये। सिर्फ मंदिर में एक संत नियुक्त करो जो दर्शकों को गीता जी का पाठ सुनाया करेगा। लेकिन प्रतिशोध के चलते समुंद्र जगन्नाथ पुरी के मंदिर को तोड़ने की अपनी ज़िद पर कायम था क्योंकि त्रेतायुग में समुंद्र ने राम को रास्ता नहीं दिया था। तब राम ने क्रोधवश समुन्द्र को नष्ट करने के लिए डराया धमकाया था और उसी का बदला लेने के लिए अब समुंद्र बार बार जगन्नाथ पुरी मंदिर निर्माण में बाधक बन रहा था।   राजा ने कृष्ण जी के आदेश अनुसार 5 बार मंदिर बनवाने की कोशिश की पर समुंद्र बड़े वेग से भीषण तूफान सरीखा उठकर आता और मंदिर को बहाकर ले जाता। राजा ने श्री कृष्ण से बार-बार मदद की विनती की लेकिन श्री कृष्ण जी भी समुंद्र को रोकने में असमर्थ रहे। धीरे धीरे राजा का खजाना भी खत्म हो गया और उसने मंदिर नही बनवाने का निर्णय लिया।

कबीर परमात्मा का संत रूप में आना-:

एक दिन कबीर परमात्मा संत रुप में राजा के पास आये और राजा को कहा की अब तुम मंदिर बनवाओ मैं तुम्हारे साथ हूं। अबकी बार समुंद्र मंदिर नहीं तोड़ेगा। राजा ने कहा की जब भगवान श्री कृष्ण जी समुंद्र को नहीं रोक पाये तो आप क्या कर पाओगे! कबीर परमेश्वर ने कहा की मुझे उस परमेश्वर की शक्ति प्राप्त है जिसने सर्व ब्रह्मांडो की रचना की है और वही समरथ प्रभु असंभव को भी संभव कर सकता है अन्य देवता नहीं। राजा ने कबीर परमात्मा की बात नहीं मानी तो कबीर जी ने अपना पता बताते हुए कहा की जब भी मंदिर बनाने का मन बने तो मेरे पास आ जाना। आखिर श्री कृष्ण जी ने राजा को स्वपन में आकर कहा की वह जो संत आया था उसकी शक्ति का कोई वार पार नहीं वह मंदिर बनवा देगा, उससे याचना करो, फिर इंद्रदमन ने कबीर जी से विनती की तो कबीर जी ने मंदिर बनवाना शुरु करवा दिया, समुंद्र भी मंदिर तोड़ने के लिए बड़े तीव्र वेग से उठकर आता और विवश होकर थम जाता क्योंकि कबीर परमात्मा अपना हाथ ऊपर को उठाते और अपनी शक्ति से समुंद्र को रोक देते।
Jagannath
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फिर समुंद्र कबीर जी से याचना करता की मैं आपके समक्ष निर्बल हूं आप से नहीं जीत सकता लेकिन मैं अपना प्रतिशोध कैसे लूं, उपाय बताएं ? तब कबीर जी ने द्वारिका को डुबोकर गुस्सा शांत करने का विकल्प बताया क्योंकि द्वारिका खाली पड़ी थी। जिस स्थान पर कबीरजी ने समुंद्र को रोका था वहाँ आज भी एक गुम्बद यादगार के रूप में मौजूद है जहाँ वर्तमान में महंत रहता है।

कबीर परमात्मा द्वारा मूर्तियां बनाना:-

इसी दौरान नाथ परंपरा के एक सिद्ध महात्मा आये और राजा से कहा की मूर्ति बिना मंदिर कैसा, आप चंदन की लकड़ी की मूर्ति बनाओ और मंदिर में स्थापित करो, राजा ने तीन मूर्तियां बनवाई जो बार बार टूट जाती थी। इस तरह तीन बार मूर्ति बनवाई और तीनों बार खंड हो गई तो राजा फिर चिंतित हुआ। सुबह जब राजा दरबार में पहुँचा तो कबीर परमात्मा एक मूर्तिकार के रुप मे आये और राजा से कहा कि मुझे 60 साल का अनुभव है, मैं मूर्तियां बनाउंगा तो नहीं टूटेंगीं। मुझे एक कमरा दे दो जिसमें मैं मूर्तियां बनाउंगा और जब तक मूर्तियां नहीं बन जाती कोई भी कमरा ना खोले। राजा ने वही किया, उधर कुछ दिन बाद नाथ जी फिर आए और उनके पूछने पर राजा ने पूरा वृतांत बताया तो नाथ जी ने कहा की पिछले 10-12 दिन से वह कारीगर मूर्ति बना रहा है, कहीं गलत मूर्तियां ना बना दे। हमें मूर्तियां को देखना चाहिये, यह सोचकर कमरे में दाखिल हुए तो कबीर परमात्मा गायब हो गये, तीनों मूर्तियां बन चुकी थी लेकिन बीच में ही व्यवधान उत्पन्न होने से तीनों मूर्तियों के हाथ और पांव की ऊँगलियां नही बनी थीं। इस कारण मंदिर में बगैर ऊँगलियों वाली मूर्तियां ही रखी गईं।
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कुछ समय उपरांत जगन्नाथ पुरी मंदिर में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा करने के लिए कुछ पंडित मंदिर में पहुँचे। मंदिर के द्वार की ओर मुंह करके कबीर परमात्मा खड़े थे। पंडित ने कबीर परमात्मा को अछूत कहते हुए धक्का दे दिया और मंदिर में प्रवेश किया। अंदर जाकर देखा तो हर मूर्ति कबीर परमात्मा के स्वरुप मे तब्दील हो गई थी और यह देखकर पंडित हैरान थे। बाद मे उस पंडित को कोढ़ हो गया जिसने कबीर परमात्मा को धक्का देकर अछूत कहा था। लेकिन दयालु कबीर परमात्मा जी ने बाद में उसे ठीक कर दिया। उसके बाद जगन्नाथ पुरी मंदिर में छुआछात नहीं हुई।

कबीर साहिब ही पूर्ण परमात्मा है-:

कबीर परमात्मा ने यहाँ सिद्ध करके बताया की वह समर्थ है और ब्रह्मा, विष्णु और महेश से ऊपर की शक्ति है। कबीर परमात्मा चारों युग में सतलोक से गति करके आते हैं सतयुग में सतसुकृत नाम से, त्रेता में मुनिंद्र नाम से, द्वापर में करुणामय नाम से, और कलयुग में अपने असली नाम कबीर (कविर्देव) नाम से आते हैं और यही सत्य वर्तमान मे भी संत रामपालजी महाराज ने बताया है की आत्मकल्याण तो केवल पवित्र गीता जी व पवित्र वेदों मे वर्णित तथा परमेश्वर कबीर के द्वारा दिये गये तत्वज्ञान के अनुसार भक्ति साधना करने मात्र से ही सम्भव है अन्यथा शास्त्र विरुद्ध होने से मानव जीवन व्यर्थ हो जाएगा।
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श्री जगन्नाथ के मन्दिर में प्रभु के आदेशानुसार पवित्र गीता जी के ज्ञान की महिमा का गुणगान होना ही श्रेयकर है तथा जैसा श्रीमद्भगवत गीता जी में भक्ति विधि है उसी प्रकार साधना करने मात्रा से ही आत्म कल्याण संभव है, अन्यथा जगन्नाथ जी के दर्शन मात्र या खिचड़ी प्रसाद खाने मात्र से कोई लाभ नहीं क्योंकि यह क्रिया श्री गीता जी में वर्णित न होने से शास्त्रविरुद्ध हुई, जो अध्याय 16 मंत्र 23,24 में प्रमाण है।

Wednesday, 17 June 2020

Janmashtami: Shiri krishna

Krishan Janmashtami


हिन्दू धर्म के प्रमुख ईष्ट देव भगवान हैं श्री कृष्ण जी।प्रभुप्रेमियों के दिलों में श्रीकृष्ण जी का विशेष स्थान है। विष्णु जी के अवतार कृष्ण जी श्रावण माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। इसलिए इस दिन को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। पूरे भारतवर्ष में आज 3 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा रही है। कोई कृष्ण को लल्ला, कान्हा, माखनचोर, सांवलिया, लड्डू गोपाल तो कोई कृष्णा कह कर प्रेम से पुकारता है। जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण की जन्म नगरी मथुरा भक्ति के रंगों में जीवंत हो जाती है।




लोकवेद के अनुसार:-जन्माष्टमी पर स्त्री पुरुष 12:00 बजे तक व्रत रखते हैं। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती हैं और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है। और रासलीला का आयोजन होता है।
स्कन्द पुराण के मतानुसार जो भी व्यक्ति जानकर भी कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत नहीं करता, वह मनुष्य जंगल में सर्प और व्याघ्र होता है। भविष्य पुराण का वचन है- भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को जो मनुष्य नहीं करता, वह क्रूर राक्षस होता है। एक मान्यता के अनुसार आधी रात के समय रोहिणी में जब कृष्णाष्टमी हो तो उसमें कृष्ण का अर्चन और पूजन करने से तीन जन्मों के पापों का नाश होता है। लेकिन कृष्ण जी खुद अपने कर्म के पाप प्रभाव को नहीं काट सके तो भक्तों के कैसे काटेंगे। (पुराणों में लिखित मत ब्रह्मा जी का है पूर्ण ब्रह्म परमात्मा का नहीं है।)
जिस समय गीता जी का ज्ञान बोला जा रहा था, उससे पहले न तो अठारह पुराण थे, न ग्यारह उपनिषद् और न ही छः शास्त्र थे। उस समय केवल पवित्र चारों वेद ही शास्त्र रूप में प्रमाणित थे और उन्हीं पवित्र चारों वेदों का सारांश पवित्र गीता जी में वर्णित है।

श्री कृष्ण जी तथा कबीर साहेब की लीलाएं:-


Krishan Janmashtami
Krishan Janmashtami

श्रीकृष्ण जी की बचपन में परवरिश गायों के दूध और मक्खन से हुई थी और कबीर साहिब जी की परवरिश वेदो अनुसार कुमारी गाय के दूध से हुई।
Krishan Janmashtami
Krishan Janmashtami
कबीर साहिब जी ने मृत कमाल और कमाली को जीवित कर दिया जबकि श्री कृष्ण जी अपने भांजे अभिमन्यु को जीवित न कर सके । जो कि सिर्फ पूर्ण परमात्मा ही कर सकता है
Krishan Janmashtami
Krishan Janmashtami
श्री कृष्ण जी बांसुरी बजाते थे तो आसपास की गोपियां और गाय इकट्ठे होकर सुनते थे लेकिन जब कबीर परमात्मा ने यमुना के किनारे एक बार बांसुरी बजाई तो यमुना का पानी स्थिर हो गया सभी पशु पक्षी यहां तक कि आसमान में देवता भी उस बांसुरी की मधुर आवाज सुनने के लिए पृथ्वी पर आ गए।
Krishan Janmashtami
Krishan Janmashtami
श्री कृष्ण जी महाभारत का युद्ध चाह कर भी नहीं रुकवा सके और उसमें करोड़ों लोग मर गए वही कबीर साहिब जी ने अपने अंतिम समय में हिंदू मुस्लिम के बीच होने वाले महाविनाश को भी रोक लिया
Krishan Janmashtami
Krishan Janmashtami
यह अवधारणा है कि द्रौपदी जी की साड़ी कृष्ण ने बढ़ाई थी, एक अर्ध सत्य है! सत्य तो यह है कि उस समय कृष्ण जी रुक्मणी के साथ चौरस खेल रहे थे यह सारा खेल कबीर भगवान ने किया और भक्ति की लाज रखी द्रौपदी जी की साड़ी बढ़ाकर।

असली वासुदेव कौन है?
श्री कृष्ण जी तीन लोक के भगवान होने के कारण त्रिलोकीनाथ कहलाते हैं
 कबीर साहेब कुल मालिक होने के कारण वासुदेव कहलाते हैं कबीर परमात्मा सर्वशक्तिमान है वहीं सृष्टि रचना है परमात्मा सतलोक में रहते हैं जहां सुख ही सुख है वहां सभी आपस में प्रेम से रहते हैं


Krishan Janmashtami
Krishan Janmashtami
श्री कृष्ण जी 16 कला के स्वामी थे जबकि कबीर साहिब अनंत कला के स्वामी हैं।

Krishan Janmashtami
Krishan Janmashtami

दुर्वासा ऋषि द्वारा दिए गए शराब के कारण पूरा यादव कुल नाश को प्राप्त हो गया वह खुद श्री कृष्ण जी भी।
वे अपने कुल को बचा नहीं पाए तो फिर इन्हें भगवान मानने में शंका होती है?

गीता में तत्वदर्शी संत की खोज कर भक्ति करने को कहा है।
पूर्ण ब्रह्म की भक्ति के लिए पवित्र गीता अ. 4 श्लोक 34 में पवित्र गीता बोलने वाला (ब्रह्म) प्रभु स्वयं कह रहा है कि पूर्ण परमात्मा की भक्ति व प्राप्ति के लिए किसी तत्वज्ञानी सन्त को ढूंढ ले फिर वह जैसे विधि बताएं वैसे कर।
Krishan Janmashtami
Krishan Janmashtami
पवित्र गीता जी को बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि पूर्ण परमात्मा का पूर्ण ज्ञान व भक्ति विधि मैं नहीं जानता। अध्याय 15 श्लोक 4 तथा अध्याय 18 श्लोक 62 व 66 में किसी अन्य परमेश्वर की शरण में जाने को कहा है।(इसका सार यह है कि तत्वदर्शी संत की खोज करो और जैसे भक्ति विधि वह बताए उसी अनुसार करते हुए मोक्ष को प्राप्त हो जाओगे)

Friday, 12 June 2020

Let's know Buddhism

बौद्ध धर्म के प्रवर्तक महात्मा बुद्ध


महात्मा गौतम बुद्ध एक पुण्यकर्मी प्राणी थे जो स्वर्ग लोक से आए थे। लोगों की आम धारणा है कि स्वर्ग प्राप्ति ही पूर्ण मोक्ष है जबकी स्वर्ग प्राप्ति तो अपने पुण्य खर्च करने का एक ज़रिया मात्र है! स्वर्ग में जो सुविधाएं उपलब्ध हैं वो यहाँ (पृथ्वीलोक) में कहां।
जो सुविधाएं पृथ्वीलोक में उपलब्ध हैं उसकी तुलना में स्वर्ग उच्च कोटी का स्थान है जहाँ आनंद भोगा जा सकता है जिन इच्छाओं का दमन पृथ्वी लोक में “तप” समझ कर किया जाता है
उन्हीं इच्छाओं की पूर्ति स्वर्ग में आसानी से हो जाती है क्योंकि साधक समझता है की यही मेरा मोक्ष है और मैं अपने पृथ्वी लोक में किए तप और त्याग का लाभ /फल भोग रहा हूं जो स्थाई और अमर है! लेकिन सच तो यह है की तप और साधना से जो पुण्य कमाए थे स्वर्ग में पुण्य कर्मों का कोटा पुरा होते ही पृथ्वीलोक (मृत्युलोक) में वापस फेंक दिया जाता है। जिस तरह महात्मा गौतम बुद्ध के पुण्य खत्म होते ही उन्हें वापस पृथ्वीलोक पर आना पड़ा।
परमात्मा प्राप्ति के लिए घर त्यागना उचित है या अनुचित:-

स्वर्ग से पृथ्वी लोक पर आने के बाद सर्व सुविधाओं का अभाव महसूस होने लगता है इसलिए आत्मा के अंदर वही सर्व सुविधाएं प्राप्त करने की कसक बनी रहती है जबकी वास्तविकता तो यह है कि यह कसक तो परमात्मा प्राप्ति कि है जो जीव को अनादि काल से ही बनी हुई है लेकिन पूर्ण भक्ति मार्ग ना मिलने से महत्वकांक्षाओं की पूर्ति में ही जीवन समाप्त हो जाता है और अगर कुछ भक्ति बनी भी तो जीव को पता भी नहीं चलता कि कब उसके पुण्य कर्म कहाँ खर्च हो गए और फिर स्वर्ग जैसे स्थान पर साधक की पुण्य कमाई समाप्त होते ही वापस पृथ्वी लोक में भेज दिया जाता है। महात्मा गौतम बुद्ध ने भी इसी कसक में घर और राज त्यागा था और बिहार राज्य में “गया” नामक शहर के बाहर एक वट वृक्ष के नीचे मनमुखी साधना शुरु कर दी थी।
इसी मनमुखी साधना के कारण शास्त्र अनुकूल साधना एवं वास्तविक मोक्ष मार्ग पर ताला पड़ गया और साधक कभी भी अपने निजधाम सतलोक नहीं पहुँच पाया क्योंकि गलत मार्गदर्शन में वह भ्रमित होकर गलत भक्ति में प्रवृत्त हो गया।

भुखा रहने या व्रत करने से भगवान मिल सकता है ?
महात्मा गौतम बुद्ध काफी समय तक निराहार बैठा रहा, हाथ पांव हिलना बंद हो गये, शरीर नर-कंकाल सरीखा हो चला और धीरे धीरे मृत्यु के निकट पहुँच गया। किसी दयावान माई ने बुद्ध के मुँह पर खीर लगा दी सोचा शायद इसके प्राण बच जाएं। बुद्ध ने वह खीर चाटनी शुरु कर दी, पहले दिन 10 -20 ग्राम, दुसरे दिन 50 -60 ग्राम, और तीसरे दिन आंख खुली तो उठकर चल पड़ा। बुद्ध को पता चला की, “भूखे रहकर साधना नहीं की जा सकती” तो अपने इस अनुभव से उसने विधान बना दिया की भूखे मरने से कल्याण संभव नहीं! तथा इसी को लोग बुद्ध की निर्वान प्राप्ति के नाम से जानते हैं। बुद्ध को ध्यान में एक रोशनी दिखाई दी जिसे आज लोग ‘डिवाइन लाइट’ कहते हैं। पर जैसे किसी खेत की सफाई करने के बाद यदि उसमे फसल नही बोई जाई तो उसमें झाड़िया उग जाती हैं उसी तरह बुद्ध अच्छी आत्मा के थे मतलब एक तरह से उनका खेत साफ था पर सही भक्ति रूपी फसल नही बीजने से उन्हें झाड़ी रूपी रोशनी दिखाई देने लगी जिसका मोक्ष मार्ग में कोई स्थान नहीं था।

सबकुछ अपने आप ही होता है या भगवान है ?
जब महात्मा बुद्ध के निर्देश अनुसार भक्ति करने से कोई लाभ नहीं हुआ तो सब ने यह मान लिया की भगवान है ही नहीं अपना काम करो और खाओ, बस। अब यहां यह समझना होगा कि बुद्ध की क्रिया के अनुसार उन्हें भगवान नहीं मिला तो इसका मतलब यह है कि भगवान पाने का उनका तरीका गलत था ना कि ये की भगवान होता ही नहीं है। लेकिन बुद्ध के कारण लोगों की मानसिकता यह बन गई की भगवान नहीं होता है सर्व ब्रह्मांड, सृष्टि, जीव-जंतु, पशु-पक्षी, सब अपने आप ही बनता और बिगड़ता है कोई कुछ नहीं है यहां पर? जीव अपने आप ही उत्पन्न होता है और नष्ट हो जाता है और भगवान है ही नहीं। लोगों ने उनकी बातों में आकर कहा कि सब भ्रमणा है और फिर यही नकारात्मक मानसिकता के आधार पर एक सिंद्धांत बन गया जो कई लोगों का अनमोल मनुष्य जीवन बर्बाद कर गया और इसके कारण कई देश जैसे चीन, म्यांमार
आदि नास्तिकता के घोर अंधेरे में चले गए और भगवान और मोक्ष से कोसों दूर हो गए।

यथार्थ ज्ञान:-
जबकि यथार्थ ज्ञान तो इससे बहुत भिन्न है कि परमात्मा है और उसकी शास्त्र अनुकूल साधना करने से ही पूर्ण मोक्ष प्राप्त हो सकता है अन्य भक्ति करने से नहीं। बुद्ध के द्वारा बनाए गए स्वयंमुखी मार्ग पर चल कर कोई भी व्यक्ति परमेश्वर प्राप्ति नहीं कर सकता। हठ योग से सांसारिक सुखों व देह त्याग तो संभव है परंतु ईश प्राप्ति कदापि नहीं। युगों की पुण्यकर्मी प्यासी और तरसती आत्मा परमात्मा के दर्शन मात्र के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने को तत्पर रहती है। पर सही गुरु व सतमार्ग का अभाव जीव के असंख्य दुखों का कारण बनता है।

महात्मा बुद्ध के कोई गुरु नहीं थे!
बिना गुरु के कभी ज्ञान नहीं होता यह सर्वमान्य है लेकिन फिर भी बुद्ध ने गुरु महिमा को नकार कर स्वयं ही एक धर्म को जन्म दिया महात्मा बुद्ध का कोई गुरु नहीं था उन्होंने परमात्मा प्राप्ति के लिए अपने अनुसार ही भक्ति शुरू की जो शास्त्र विरुद्ध साधना थी हमारे ग्रंथों में लिखा है अगर कोई शास्त्र विरुद्ध साधना करता है उसे न तो कभी सुख की प्राप्ति होती है और ना ही उसका मोक्ष होता है महात्मा बुद्धएक पुण्यात्मा थी लेकिन शास्त्र विरुद्ध भक्ति करने से उन्हें कोई लाभ प्राप्त नहीं हुआ उन्होंने वही भक् अपने शिष्यों को दी
 इसका परिणाम यह हुआ कि उनके अनुयायियों का भगवान से विश्वास उठ गया बुद्ध ने हमेशा अहिंसा का पाठ पढ़ाया लेकिन उनके अनुयाई अहिंसा का पाठ ने पढ़कर हिंसा पर उतारू हो गए और निर्दोष चीजों की निर्मम हत्या करने लगे यह दुर्भाग्य की बात है

कि गौतम बुद्ध जी जिन्हें बहुत बड़ा महात्मा माना जाता था वह बिल्कुल ही ज्ञान हीन थेऔर करोड़ों संख्या में लोगों को नास्तिक बना दिया जिससे दुनिया विनाश की कगार पर खड़ी है।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताया गया शास्त्र अनुकूल ज्ञान
परमेश्वर प्राप्ति के लिए कलयुग में परमात्म स्वयं सतलोक से धरती पर अवतरित हुए हैं। पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब हैं जो सतलोक में सशरीर ऊँचे सिंहासन पर विराजमान हैं, जिन्होंने सर्व ब्रह्माण्डों की उत्पत्ति करके मनुष्य को अपने स्वरुप के अनुसार बनाया। मोक्ष का सतमार्ग जानने के लिए परमेश्वर कबीर जी द्वारा बताए भक्ति मार्ग पर चलिए व ज्ञान समझ कर ग्रहन करें परमात्मा स्वयं मिल जाएंगे। यही सच वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज ने बताने की कोशिश की तो सत्य बोलने की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी। उन्होनें जन-जन को यही बताया की पिछले जन्मों के पुण्यकर्मी संस्कारी प्राणी ही परमात्मा की तड़प में घर त्याग देते हैैं और जो भी कोई जैसा भी मार्गदर्शन करता है साधक वैसी ही साधना करने लगता है। जिससे ना ही उसे सुख की प्राप्ति होती है और ना ही से मोक्ष का पता होता है
आइए संत रामपाल जी महाराज जी का ज्ञान समझ कर उनसे नाम दीक्षा ले और अपना अनमोल जीवन सफल बनाएं संत रामपाल जी महाराज जी वह पुरानी गुरु जो हमें शास्त्रों के अनुसार भक्ति बताते हैं और मोक्ष की गारंटी देते हैं।

Wednesday, 10 June 2020

Holy Bible

पवित्र बाइबल

आइए आज हम एक ऐसे विषय के बारे में बात करते हैं जो हमारे मनुष्य जीवन में अहम योगदान रखता है वह है परमात्मा।परमात्मा के बारे में सब की अलग-अलग राय होती है कोई परमात्मा को निराकार बताता है कोई कहता है कि परमात्मा कभी दिखाई नहीं देते लेकिन फिर भी हम परमात्मा की भक्ति करने के लिए उत्सुक रहते हैं हम अलग अलग तरीके से परमात्मा को पाने का प्रयास करते हैं जिसने जैसा भी कहा हम वैसे ही परमात्मा को पाने का प्रयत्न करते हैं लेकिन हम सब कुछ करने के बाद भी असफल हो जाते हैं क्योंकि हम शास्त्र विधि के अनुसार भक्ति नहीं करते हैं इसलिए हमें जीवन में ना तो कोई सुख प्राप्त होता है और ना ही शांति मिलती है।

पवित्र बाइबल में सृष्टि रचना का प्रमाण:-

पवित्र बाइबल में हमें कई प्रमाण मिलते हैं जिससे साबित होता है कि परमात्मा साकार है मनुष्य दृश्य है उसमें 6 दिन में सृष्टि रची तथा साथ में दिन तत्पर जा बिराजा। कुरान शरीफ में पवित्र बाइबल का भी ज्ञान है इसलिए इन दोनों पवित्र सद ग्रंथों ने मिलजुल कर प्रमाणित किया है कि कौन तथा कैसा है सृष्टि रचना तथा उसका वास्तविक नाम क्या है।
पवित्र बाइबल (उत्पत्ति ग्रंथ प्रश्न नंबर 2 पर ,अ.1:20 -2:5पर)

प्राणी और मनुष्य: अन्य प्राणियों की रचना करके 26.फिर परमेश्वर ने कहा हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं जो सर्व प्राणियों को काबू रखेगा।
27.तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया अपने ही स्वरुप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया नर और नारी करके मनुष्य की सृष्टि की।
29.प्रभु ने मनुष्यों के खाने के लिए जितने बीच वाले छोटे पेड़ तथा जितने पेड़ों पर बीज वाले फल होते हैं वह भोजन के लिए प्रदान किए हैं मांस खाना नहीं कहा है।
ईसा मसीह ने दुनिया को प्रेम और अहिंसा का संदेश दिया ईसा मसीह को चाहने वाले ज्यादातर मांसाहारी क्यों बन गए क्या सच में अन्य जीवों की खुशियां छीन कर अपना पेट भरना यही मार्ग ईशा जी ने हमें दिखाया था?
सातवां दिन:-विश्राम का दिन:
परमेश्वर ने 6 दिन में सर्वश्रेष्ठ की उत्पत्ति की तथा साथ में दिन विश्राम किया ।
पवित्र बाइबल ने सिद्ध कर दिया कि परमात्मा मानव दृश्य शरीर में है जिसने 6 दिन में सर्वश्रेष्ठ की रचना की तथा फिर विश्राम किया।


जिस तरह जीसस ने सत्य के लिए संघर्ष किया जिसका परिणाम उनका घोर विरोध हुआ और उनको सूली पर चढ़ाया गया उसी प्रकार आज सतगुरु रामपाल जी महाराज की सत्य के लिए संघर्ष करते हुए जेल में है।
संत रामपाल जी महाराज ने हमें सभी संत ग्रंथों के बारे में पूर्ण जानकारी दी हमें बताया कि वह परमात्मा जिसकी हमें भक्ति करनी चाहिए वह कबीर देव है जिसका प्रमाण हमें हमारे सभी सब ग्रंथों में मिला है ।

रामपाल जी महाराज ही पूर्ण परमात्मा को पाने की सरल भक्ति विधि बताते हैं आप भी संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान सुनकर तथा समझ कर उनसे नाम दीक्षा लेकर अपना मनुष्य जीवन सफल बनाएं।


Thursday, 4 June 2020

KabirPrakatDiwasNotJayanti


कबीर परमात्मा का प्रकट दिवस मनाते हैं, जयंती नहीं होती।


आज बताएंगे कि कबीर साहेब का जन्म दिवस नहीं होता, प्रकट दिवस होता है।



*सतगुरु रामपाल जी महाराज जी* प्रमाणित करके बताते हैं :-

🎆कबीर साहेब का प्रकट दिवस होता है, जयंती नहीं!
सन् 1398 (विक्रमी संवत् 1455) ज्येष्ठ मास शुद्धि पूर्णमासी को ब्रह्ममूहूर्त में अपने सत्यलोक से सशरीर आकर परमेश्वर कबीर बालक रूप बनाकर लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर विराजमान हुए।
पूर्ण परमात्मा का माँ के गर्भ से जन्म नहीं होता।
🎆कबीर साहेब का जन्म नहीं होता!
आदरणीय गरीब दास जी ने भी अपनी वाणी के माध्यम से यह बताया है कि परमात्मा कबीर जी की कोई माता नही थी अर्थात उनका जन्म माँ के गर्भ से नही हुआ।
गरीब, अनंत कोटि ब्रह्मांड में, बंदीछोड़ कहाय। 
सो तो एक कबीर हैं, जननी जन्या न माय।।

🎆कबीर परमात्मा का प्रकट दिवस होता, जयंती नहीं!
पूर्ण परमात्मा कबीर जी का का जन्म कभी मां के गर्भ से नहीं होता। 
इसलिए उनका प्रकट दिवस मनाया जाता है 
कबीर जी अपने प्रकट होने के बारे में कहते है -
न मेरा जन्म न गर्भ बसेर, बालक बन दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा तहां जुलाहे ने पाया।।

🎆कबीर साहेब जयंती VS कबीर साहेब प्रकट दिवस
जयंती तो उसकी मनाई जाती है जिसकी जन्म- मृत्यु होती है, लेकिन "कबीर साहेब" अविनाशी भगवान हैं, जिनकी कभी भी जन्म-मृत्यु नहीं होती।

🎆कबीर साहेब जयंती VS कबीर साहेब प्रकट दिवस
कबीर साहेब ने अपनी वाणियों में स्पष्ट किया है, कि उनका जन्म नहीं होता।
ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।
माता पिता मेरे कछु नाही, ना मेरे घर दासी।
जुलहे का सुत आन कहाया, जगत करे मेरी हांसी।।

🎆कबीर साहेब जयंती VS कबीर साहेब प्रकट दिवस
कबीर साहेब चारो युगों में प्रकट होकर पृथ्वी लोक पर आते हैं। उनका कभी माँ के गर्भ से जन्म नहीं होता। कमल के फूल पर प्रकट होते हैं। इसीलिए इसे जयंती नही प्रकट दिवस के रूप में मनाया जाता है।

🎆हिन्दू मुस्लिम के बीच में, मेरा नाम कबीर।
आत्म उद्धार कारणे, अविगत धरा शरीर।।
कबीर साहेब ने इस वाणी में कहा है कि लोगो का आत्म उद्धार करने के लिए परमात्मा इस पृथ्वी पर प्रकट होते हैं।

🎆सभी देवों का जन्म दिवस तो आखिर कबीर जी का प्रकट दिवस क्यों ?
पूर्ण परमात्मा कबीर जी के अलावा सभी देव जन्म-मृत्यु में हैं और प्रकट दिवस सिर्फ अविनाशी परमात्मा का ही मनाया जाता है क्योंकि वह जन्म नहीं लेते बल्कि हर युग में कमल के फूल पर प्रकट होते हैं।

🎆सिर्फ कबीर जी का ही प्रकट दिवस क्यों ?*
   ऋग्वेद मंडल नंबर 9 सूक्त 1 मंत्र 9 में प्रमाण है कि वह परमात्मा सतलोक से शिशु रूप धारण करके प्रकट होता है और कुंवारी गायों के दूध से उसकी परवरिश होती है ।
ऋग्वेद  मंडल नंबर 9 सूक्त 96 मंत्र 17 में भी वर्णन है कि पूर्ण परमात्मा कबीर जी जान बूझकर बालक रूप में प्रकट होते है।
इसलिए उनका प्रकट दिवस मनाया जाता है ।
🎆जिनका अवतरण होता है उनका जन्म दिवस नहीं होता।
कबीर परमात्मा हर युग में शिशु रूप में कमल के फूल पर अवतरित होते हैं, इसलिए उनका प्रकट दिवस मनाया जाता है

🎆चारों युगों में सिर्फ कबीर परमात्मा के प्रकट होने के ही प्रमाण हैं
सतयुग में सत सुकृत नाम से,
त्रेता में मुनीन्द्र नाम से, 
द्वापर में करुणामय नाम से,
और कलयुग में अपने असली नाम कबीर नाम से प्रकट होते हैं।
बाकी सभी देव मां के गर्भ से जन्म लेते हैं।
🎆कबीर जयंती और कबीर प्रकट दिवस में अंतर
जो जन्मता है उसकी जयंती मनाई जाती है, जो अजन्मा है, स्वयंभू है, वह प्रकट होता है। कबीर साहेब, अमर पुरूष लीला करते हुए बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होते हैं।

इन पंक्तियों में कबीर साहेब जी की महिमा का गुणगान किया गया।

*गरीब, भक्ति मुक्ति ले उतरे, मेटन तीनूं ताप।*
*मोमन के डेरा लिया, कहै कबीरा बाप।।*

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Wednesday, 3 June 2020

Deepknowledge of godKabir

कबीर परमात्मा का अद्भुत ज्ञान

आज कबीर साहेब द्वारा दिए गए गूढ़ ज्ञान के बारे में बताएंगे।
*सतगुरु रामपाल जी महाराज जी* प्रमाणित करके बताते हैं :-

🌿अद्भुत ज्ञान
कबीर परमेश्वर ने ही सतलोक के विषय में बताया कि ऊपर एक ऐसा लोक है जहां सर्व सुख है। वहां कोई कष्ट नहीं है। जिसकी गवाही संत गरीबदास जी ने दी है।
गरीब, संखो लहर महर की उपजै, कहर जहां न कोई।
दास गरीब अचल अविनाशी, सुख का सागर सोई।।
🌿तीनों देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की वास्तविक स्थिति से परिचित करवाते हुए परमात्मा कबीर जी ने कहा :-
तिनके सूत है तीनों देवा, आंधर जीव करत हैं सेवा।

🌿गूढ़ ज्ञान
आज का समाज परमात्मा कबीर जी को एक सामान्य संत समझता है जबकि अपनी महिमा बताते हुए परमात्मा कबीर जी ने हमें बताया कि वही सृष्टि के रचनहार हैं और चारों युगों में आते हैं।
आज परमात्मा की सम्पूर्ण जानकारी संत रामपाल जी महाराज ही सबको बता रहे हैं।
🌿कबीर परमेश्वर ने बताया कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश की भी जन्म तथा मृत्यु होती है। इनकी माता दुर्गा तथा पिता काल (ब्रह्म) हैं।
कबीर, मां अष्टंगी पिता निरंजन, ये जम दारुण वंशन अंजन।
तीन पुत्र अष्टंगी जाए, ब्रह्मा विष्णु शिव नाम धराए।।
 🌿कबीर परमेश्वर जी ने गुरू और सतगुरू में भेद बताया तथा सच्चे गुरु के लक्षण बताए।
सतगुरु के लक्षण कहु, मधुरे बेन विनोद, चार वेद छः सास्त्र, वो कह अट्ठारह बोध।।
कबीर साहेब जी ने तत्वज्ञान दिया कि मानव जीवन में सतगुरु बनाकर भक्ति करना परमावश्यक है। सच्चे गुरु की शरण में जाकर दीक्षा लेने से ही पूर्ण लाभ मिलेगा, अन्यथा मानव जीवन बर्बाद है।
वर्तमान में पूर्ण सतगुरु केवल संत रामपाल जी महाराज ही हैं। उनसे सतभक्ति प्राप्त करके मोक्ष प्राप्त करें।
🌿कबीर साहेब जी ने कहा है कि मनुष्य जन्म बहुत अनमोल है इसे शास्त्र विरुद्ध साधना करके व्यर्थ नहीं करना चाहिए, क्योंकि मनुष्य जन्म बार बार नहीं मिलता।
मानुष जन्म दुर्लभ है, ये मिले ना बारंबार।
जैसे तरवर से पत्ता टूट गिरे, वो बहुर न लगता डार।।
🌿 कबीर परमात्मा जी का बताया परम गूढ़ ज्ञान
कबीर परमात्मा ने अध्यात्म के बहुत से गूढ़ रहस्यों से पर्दा उठाते हुए बताया है कि भक्ति को जिंदा रखने के लिए मैंने ही द्रोपदी का चीर बढ़ाया था और मैंने ही हिरण्यकश्यप तथा कंस को मारा था।
🌿अद्भुत ज्ञान परमात्मा का
कबीर साहेब ने हमे अक्षर पुरुष, क्षर पुरुष और तीनों देवता की स्थिति का वर्णन इस वाणी के द्वारा समझाया है।
कबीर, अक्षर पुरुष एक पेड़ है, निरंजन वाकी डार।
तीनों देवा शाखा हैं, ये पात रूप संसार।।

🌿 तत्वज्ञान
कबीर साहेब ने ही हमें अवगत कराया कि हमें जन्म देने व मारने में काल (ब्रह्म) प्रभु का स्वार्थ है जोकि श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 11 श्लोक 32 में कहता है कि मैं बढ़ा हुआ काल हूँ अर्जुन।
🌿 कबीर परमेश्वर ने ही बताया था कि परमात्मा सभी पापों से मुक्त कर सकता है। आज संत रामपाल जी महाराज ने वेदों से प्रमाणित करके बता दिया कि परमात्मा साधक के घोर पाप को भी समाप्त कर देता है। देखिये प्रमाण "यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13"।
🌿परम दिव्य ज्ञान
परमेश्वर कबीर साहेब जी ने ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश के माता-पिता का ज्ञान कराया तथा उनकी उत्पत्ति बताई।
कबीर साहिब ने ही सतलोक का ज्ञान दिया।
🌿सभी धर्म के धर्मगुरुओं ने आज तक यही बताया है कि परमात्मा/रब/गॉड/अल्लाह/खुदा निराकार है, उसका केवल प्रकाश देखा जा सकता है। लेकिन सर्वप्रथम कबीर जी ने इसका खंडन करते हुए बताया कि परमात्मा/अल्लाह/गॉड साकार है, नराकार है।
🌿ज्ञान का भंडार - कबीर परमात्मा
परमात्मा कबीर जी ने धर्मदास जी को बताया कि मैं अपनी प्यारी आत्माओं को काल के जाल से निकालने के लिए काल के इन 21 ब्रह्मांडों में घूमता रहता हूं और सत्य ज्ञान देकर व शास्त्रानुकूल साधना बताकर पार करता हूं।

🌿 कबीर परमेश्वर ने ही बताया था कि परमात्मा सभी पापों से मुक्त कर सकता है। आज संत रामपाल जी महाराज ने वेदों से प्रमाणित करके बता दिया कि परमात्मा साधक के घोर पाप को भी समाप्त कर देता है। देखिये प्रमाण "यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13"।
🌿 कबीर परमात्मा का तत्वज्ञान
काल कौन है, कहां रहता है, वह हमें कष्ट क्यों देता है, काल के सभी कार्यों के बारे में परमात्मा कबीर जी ने ही विस्तार से बताया है ।
सतलोक पृथ्वी लोक से कितनी दूरी पर स्थित है और वहां कैसे जाया जा सकता है। यह जानकारी कबीर परमात्मा जी ने ही दी है ।

🌿सत ज्ञान
कबीर परमेश्वर ने ही यथार्थ ज्ञान बताया कि ब्रह्मा विष्णु महेश की जन्म और मृत्यु होती है, ये अविनाशी नहीं है। 
यही प्रमाण श्रीमद्देवी भागवत पुराण, स्कंद 3, अध्याय 5 में है।
🌿 वास्तविक धर्म का ज्ञान
कबीर परमेश्वर जी ने सभी धर्मों के लोगों को संदेश दिया कि सब मानव एक परमात्मा की संतान हैं। अज्ञानता वश हम अलग-अलग जाति धर्मों में बंट गये। 
जीव हमारी जाति है,मानव धर्म हमारा।
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।।
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, आपस में सब भाई-भाई।
आर्य जैनी और विश्‍नोई, एक प्रभु के बच्चे सोई।।

🌿तत्वज्ञान
कबीर परमेश्वर जी ने शास्त्रानुकूल भक्ति तथा शास्त्रविरूद्ध भक्ति का भेद बताया।
शास्त्र अनुकूल साधना करने से सुख व मोक्ष संभव है तथा शास्त्रविरूद्ध साधना करने से जीवन हानि तथा नरक व चौरासी का कष्ट सदैव बना‌ रहेगा।
(गीता अ.16, श्लोक 23-24)

🌿कबीर परमेश्वर ने बताया कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश की भी जन्म तथा मृत्यु होती है। इनकी माता दुर्गा तथा पिता काल (ब्रह्म) हैं।
कबीर, मां अष्टंगी पिता निरंजन, ये जम दारुण वंशन अंजन।
तीन पुत्र अष्टंगी जाए, ब्रह्मा विष्णु शिव नाम धराए।।
🌿 परमात्मा कबीर साहेब जी ने ही हमे बताया है कि संसार में करोड़ों नाम (मंत्र) हैं उनसे मुक्ति नहीं होती, सारनाम से ही मुक्ति होती है लेकिन उस मंत्र को कोई नहीं जानता।
उस मंत्र को सिर्फ तत्वदर्शी संत ही बता सकता है।
कबीर, कोटि नाम संसार में, इनसे मुक्ति ना होय।
सारनाम मुक्ति का दाता, वाको जाने न कोय।।

Tuesday, 2 June 2020

DivinePlay_Of_GodKabir

 कबीर परमात्मा की अद्भुत लीलाएं


*सतगुरु रामपाल जी महाराज जी* प्रमाणित करके बताते हैं :-

🔅कबीर साहेब द्वारा सर्वानंद को शरण में लेना
पंडित सर्वानंद ने अपनी माँ से कहा कि मैंने सभी ऋषियों को शास्त्रार्थ में हरा दिया है तो मेरा नाम सर्वाजीत रख दो लेकिन उनकी माँ ने सर्वानंद से कहा कि पहले आप कबीर साहेब को शास्त्रार्थ में हरा दो तब आपका नाम सर्वाजीत रख दिया जाएगा। जब सर्वानंद कबीर साहेब के पास शास्त्रार्थ करने पहुँचे तो कबीर साहेब ने कहा कि आप तो वेद-शास्त्रों के ज्ञाता हैं मैं आपसे शास्त्रार्थ नहीं कर सकता। तब सर्वानंद ने एक पत्र लिखा कि शास्त्रार्थ में सर्वानंद जीते और कबीर जी हार गए। उस पर कबीर साहेब जी से अंगूठा लगवा लिया। लेकिन जैसे ही सर्वानंद अपनी माँ के पास जाते तो अक्षर बदल कर कबीर जी जीते और पंडित सर्वानंद हार गए ये हो जाते। ये देखकर सर्वानंद आश्चर्य चकित हो गए और आखिर में हार मानकर सर्वानंद ने कबीर साहेब की शरण ग्रहण की।

🔅सम्मन को पार करना
सम्मन बहुत गरीब था। जब कबीर परमात्मा का भक्त बना। तब परमात्मा के आशीर्वाद से दिल्ली का महान धनी व्यक्ति हो गया, परंतु मोक्ष की इच्छा नहीं बनी।
सम्मान ने अपने परमेश्वर रूप सतगुरु के लिए अपने बेटे की कुर्बानी की थी। जिस कारण अगले जन्म में नौशेरखान शहर के राजा के घर जन्मा। फिर ईराक देश में बलख नामक शहर का राजा अब्राहिम सुल्तान बना। परमात्मा ने उस आत्मा के लिए अनेकों लीलाएं की और उसका उद्धार किया।

🔅दादू जी का उद्धार
सात वर्ष की आयु के दादू जी को परमात्मा कबीर जी जिंदा महात्मा के रूप में मिले व ज्ञान समझाया और सतलोक दिखाया।
इसलिए परमात्मा कबीर जी की महिमा गाते हुए दादू  जी कहते हैं :-
जिन मोकूं निज नाम दिया, सोई सतगुरु हमार ।
दादू दूसरा कोई नहीं, कबीर सिरजनहार ।।

🔅मीरा बाई को शरण में लेना
मीरा बाई पहले श्री कृष्ण जी की पूजा करती थी। एक दिन संत रविदास जी तथा परमात्मा कबीर जी का सत्संग सुना तो पता चला कि श्री कृष्ण जी नाशवान हैं। समर्थ अविनाशी परमात्मा अन्य है। संत रविदास जी को गुरू बनाया। फिर अंत में कबीर जी को गुरू बनाया। तब मीरा बाई जी का सत्य भक्ति बीज का बोया गया।
गरीब, मीरां बाई पद मिली, सतगुरु पीर कबीर। 
देह छतां ल्यौ लीन है, पाया नहीं शरीर।।
संत गरीबदास जी को शरण में लेना
🔅तेरह गाड़ी कागजों को लिखना
    एक बार दिल्ली के बादशाह ने कहा कि कबीर जी ढ़ाई दिन में तेरह गाड़ी कागजों को लिख दे तो मैं उनको परमात्मा मान जाऊंगा । परमात्मा ने गाड़ियों में रखे कागजों पर अपनी डण्डी घुमा दी। उसी समय सर्व कागजों में अमृतवाणी सम्पूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान लिख दिया। राजा को विश्वास हुआ।

🔅धर्मदास को सदमार्ग दिखाना
भक्त धर्मदास जी बांधवगढ़ के धनी सेठ थे। देवी तथा
शिव-पार्वती की पूजा, तीर्थों व धामों पर जाकर स्नान करना आदि शास्त्रविरूद्ध साधना किया करता था। 
धर्मदास जी जब तीर्थ यात्राओं पर निकले तो परमात्मा कबीर जी जिंदा महात्मा के वेश में उन्हें मिले और बार-बार ज्ञान की चोट की, सतलोक के दर्शन कराए और अपनी शरण में लिया।
🔅ऋषि दत्तात्रे जी ने परमात्मा कबीर जी (ऋषि मुनीन्द्र रूप से) तत्वज्ञान समझा, दीक्षा ली। सतनाम तक मिला। सारनाम उस समय किसी को नहीं देना था क्योंकि सारनाम पर उस समय ऋषियों को विश्वास नहीं होना था। कलयुग के पाँच हजार पाँच सौ पाँच वर्ष बीतने तक सार नाम, सार ज्ञान (तत्वज्ञान) गुप्त रखना था। ये दोनों कारण मुख्य रहे। जिस कारण से सारनाम नहीं दिया गया।
गरीब, दुर्बासा और मुनिंद्रका, हुवा ज्ञान संवाद। दत्त तत्त्व में मिल गये, जा घर विद्या न बाद।।
सुपच सुदर्शन को पार किया।

🔅बली राजा की यज्ञ में बावना बने। फिर विशाल रूप किया। गज तथा मगरमच्छ युद्ध कर रहे थे तो उनकी भी गति भक्ति अनुसार की। द्रोपदी का चीर भी परमात्मा कबीर जी ने बढ़ाया। द्रोपदी श्री कृष्ण की भक्त थी। इसलिए बड़ाई कृष्ण को मिली।

🔅एक बार द्रौपदी ने अंधे महात्मा को अपनी साड़ी के कपड़े में से टुकड़ा दिया था क्योंकि अंधे महात्मा की कोपीन पानी में बह गई थी। साधु ने आशीर्वाद अनंत चीर पाने का आशीर्वाद दिया। कबीर परमात्मा ने चीरहरण में द्रौपदी का चीर बढ़ाकर लाज बचाई।
गरीब, पीतांबर कूं पारि करि, द्रौपदी दिन्हीं लीर।
अंधे कू कोपीन कसि, धनी कबीर बधाये चीर।।
नीरू को धन प्राप्ति

🔅कबीर परमेश्वर जब नीरू नीमा को बालक रूप में मिले तब उससे पूर्व दोनों जने (पति-पत्नी) मिलकर कपड़ा बुनते थे। 25 दिन बच्चे की चिन्ता में कपड़ा बुनने का कोई कार्य न कर सके। जिस कारण से कुछ कर्ज नीरू को हो गया। फिर कबीर जी ने कहा कि आप चिंतित न हों, आपको प्रतिदिन एक सोने की मोहर (दस ग्राम स्वर्ण) पालने के बिछौने के नीचे मिलेगी। आप अपना कर्ज उतार कर अपना तथा गऊ का खर्च निकाल कर शेष बचे धन को धर्म कर्म में लगाना। उस दिन के पश्चात् दस ग्राम स्वर्ण प्रतिदिन नीरू के घर परमेश्वर कबीर जी की कृपा से मिलने लगा।



🔅पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब ने विट्ठल रूप धारण कर नामदेव की रोटी खाई तथा उसकी झोपड़ी बनाई।
बिठल होकर रोटी खाई, नामदेव की कला बढ़ाई।
पुंण्डरपुर नामा प्रवान, देवल फेर छिवा दई छान।।
कोढ़ की असहनीय पीड़ा से दुखी सैकड़ों व्यक्तियों को परमात्मा ने रोगमुक्त किया और अपनी शरण में लिया ।
इस प्रकार कबीर परमात्मा की अनेकों लीलाएं है जिसका वर्णन करना बहुत मुश्किल है कबीर साहिब जी पूर्ण परमात्मा है उन्होंने पूरी सृष्टि को रचा है वे सबके पालनहार हैं कबीर परमात्मा चारों युगों में आते हैं और अपनी प्यारी आत्माओं को सत भक्ति देखकर मोक्ष का मार्ग देते हैं सतयुग में सत सुकृत नाम से आए त्रेता में मुनींद्र नाम से आए द्वापर में करुणा में नाम से प्रगट हुए और कलयुग में कबीर नाम से आएआज कबीर परमात्मा संत रामपाल जी महाराज के रूप में इस धरती पर आए हुए हैं आप सभी संत रामपाल जी महाराज के सत्संग सुनकर तथा उनकी पवित्र पुस्तकें ज्ञानगंगा, जीने की राह ,भक्ति से भगवान तक, गीता तेरा ज्ञान अमृत ,आदि पुस्तकों का अध्ययन करें। और अपने सब ग्रंथों की पूर्ण जानकारी प्राप्त करें।
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संत रामपाल जी महाराज पूरे विश्व में एकमात्र ऐसे संत हैं जो मोक्ष की गारंटी देते हैं आइए और संत रामपाल जी महाराज जी से दीक्षा प्राप्त करके अपना मोक्ष करवाइए।
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धन्यवाद

Mahashivratri kab h

शिवरात्रि का व्रत Mahashivratri जैसे ही शिवरात्रि नजदीक आती है हर शिवभक्त के मन मे भक्ति भाव की लहर दौड़ पड़ती है। कोई पूछता है कि शिव...